पहले ही दिन उद्धव को देखने पड़े फडणवीस के तल्ख तेवर काम नहीं आई झप्पी। - Amar Ujalas

पहले ही दिन उद्धव को देखने पड़े फडणवीस के तल्ख तेवर काम नहीं आई झप्पी।

पहले ही दिन उद्धव को देखने पड़े फडणवीस के तल्ख तेवर काम नहीं आई झप्पी।

(devendra fundvis ka uddhav pr kahar)पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बहुमत परीक्षण और उद्धव ठाकरे को संविधान के खिलाफ शपथ दिलाई। भाजपा बहुमत परीक्षण के बीच बाहर चली गई। ऐसी स्थिति में पहले ही दिन उद्धव को फड़नवीस का कड़ा रुख देखना पड़ा।

 

1.उद्धव सरकार को फ्लोर टेस्ट में 169 वोट मिले

2.बीजेपी ने पहले ही दिन सदन में हंगामा खड़ा कर दिया

(devendra fundvis ka uddhav pr kahar)महाराष्ट्र में उद्धव सरकार ने फ्लोर टेस्ट पास कर लिया है। बहुमत परीक्षण में उद्धव सरकार के पक्ष में कुल 169 वोट पड़े। वहीं, विपक्ष में एक भी वोट नहीं पड़ा। मतदान के दौरान कुल 4 विधायक तटस्थ रहे, जबकि मनसे ने सरकार के पक्ष में मतदान नहीं किया। हालांकि, इससे पहले सदन में बीजेपी ने जमकर हंगामा काटा।

पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बहुमत परीक्षण और उद्धव ठाकरे को संविधान के खिलाफ शपथ दिलाई। भाजपा बहुमत परीक्षण के बीच बाहर चली गई। ऐसी स्थिति में पहले ही दिन उद्धव को फड़नवीस का कड़ा रुख देखना पड़ा। हालांकि, हंगामे के बीच, सीएम उद्धव ठाकरे पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस को गले लगाने के लिए विपक्ष के नेता की कुर्सी पर चले गए। उद्धव ने फड़नवीस को गले लगाया।

उद्धव सरकार ने किया फ्लोर टेस्ट, 169 विधायकों का समर्थन

फडणवीस राज्यपाल से करेंगे शिकायत

सदन शुरू होते ही फडणवीस ने कहा कि सदन की शुरुआत वंदे मातरम से क्यों नहीं की गई। इससे भाजपा खेमे में हूटिंग शुरू हो गई। फडणवीस ने कहा कि जब भी कोई फ्लोर टेस्ट होता है, तो वह पहले नियमित स्पीकर की नियुक्ति के बाद होता है। इसलिए, नियमों को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने एक प्रो टेम्पल स्पीकर चुना और एक फ्लोर टेस्ट किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा जो संविधान के अनुसार नहीं चलती है, हम उसमें भाग नहीं ले सकते। संविधान के नियमों का उल्लंघन किया गया है, इसलिए राज्यपाल को इस कार्रवाई को रद्द करना चाहिए। हम राज्यपाल के पास जाएंगे और उन्हें अनियमितता का पत्र देंगे।

प्रोटेम स्पीकर को क्यों बदला गया?

फडणवीस ने कहा कि जब तक नए स्पीकर की नियुक्ति नहीं हो जाती, तब तक प्रोटेम स्पीकर बने रहना जरूरी है। प्रोटेम स्पीकर क्यों बदला गया। अगर यही सत्र चल रहा है तो प्रोटेम स्पीकर को क्यों बदल दिया गया। ये गलत है। देश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। डर या जरूरत क्या थी कि प्रोटेम स्पीकर बदल दिया गया। अध्यक्ष के चुनाव से पहले फ्लोर टेस्ट नहीं किया जा सकता है। स्थायी स्पीकर नियुक्त होने तक विश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता है।

प्रोटेम स्पीकर ने दावे को खारिज कर दिया

पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में भाजपा सदस्यों ने कहा कि दो दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन नियमों का उल्लंघन है। हालांकि, प्रोटेम स्पीकर दिलीप वाल्से पाटिल ने भाजपा की आपत्ति को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के निर्देशानुसार विशेष सत्र आयोजित किया जा रहा है।

फ्लोर टेस्ट में मिला समर्थन

महाराष्ट्र विकास अघाड़ी को 169 विधायकों का समर्थन मिला। जिसमें शिवसेना के 56, एनसीपी के 54, कांग्रेस के 44, सपा के 2, स्वाभिमानी शेतकारी के एक, बहुजन विकास अघडी के 3, पीडब्ल्यूपी के एक और निर्दलीय 10 विधायकों ने उद्धव सरकार के पक्ष में मतदान किया। इसमें एनसीपी के एक विधायक को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था, जिसके कारण 169 विधायकों ने मतदान किया था।

 

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